Mahatma Gandhi
गांधी मरते नहीं हैं
बेफिक्र रहिए गांधी मरा नहीं करते, क्योंकि वो व्यक्ति नहीं विचार हैं।
आजकल बापू के पुतले पर खिलौने से गोली मारने, लाल रंग बहने और उसके बाद पुतले को जलाने का video तमाम बुद्धिजीवी लोग अपने wall पर post कर देश की चिंता कर रहे हैं।
यकीन मानिए मुझे पूरा video देखकर हंसी आ रही थी इसमें जितने भी लोग हैं वो अपने से और ढंग से कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं और शरीर और दिमाग दोनों से उतने स्वस्थ भी नहीं दिख रहे हैं, साथ ही वो अपने कृत्य से खुद ही सहमत नहीं दिख रहे हैं और जब जितना कहा जा रहा है उतना ही कर रहे हैं।
मगर इसका जो छुटभैया director है उसका काम देश की फिक्र करने वाले लोग जरूर कर रहे हैं। मतलब आप किसी भी ऐरे गैरे को celebrity बना रहे हैं। Please ऐसे लोगों की मुफ्त में publicity का काम अनजाने में मत करिए। सचमुच यदि आपको किसी की फिक्र social network पर ही करनी है तो बस ऐसी वाहियात चीजों को delete करिए।
(Please don't like, comment or share such materials.. Just delete them)
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गांधीवादी विचारधारा क्या है?
गांधीवादी विचारधारा महात्मा गांधी द्वारा अपनाई और विकसित की गई उन धार्मिक-सामाजिक विचारों का समूह जो उन्होंने पहली बार वर्ष 1893 से 1914 तक दक्षिण अफ्रीका में तथा उसके बाद फिर भारत में अपनाई थी।
गांधीवादी दर्शन न केवल राजनीतिक, नैतिक और धार्मिक है, बल्कि पारंपरिक और आधुनिक तथा सरल एवं जटिल भी है। यह कई पश्चिमी प्रभावों का प्रतीक है, जिनको गांधीजी ने उजागर किया था, लेकिन यह प्राचीन भारतीय संस्कृति में निहित है तथा सार्वभौमिक नैतिक और धार्मिक सिद्धांतों का पालन करता है।
यह दर्शन कई स्तरों आध्यात्मिक या धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, व्यक्तिगत और सामूहिक आदि पर मौजूद है। इसके अनुसार-
आध्यात्मिक या धार्मिक तत्व और ईश्वर इसके मूल में हैं।
मानव स्वभाव को मूल रूप से सद्गुणी है।
सभी व्यक्ति उच्च नैतिक विकास और सुधार करने के लिये सक्षम हैं।
गांधीवादी विचारधारा आदर्शवाद पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक आदर्शवाद पर ज़ोर देती है।
गांधीवादी दर्शन एक दोधारी तलवार है जिसका उद्देश्य सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के अनुसार व्यक्ति और समाज को एक साथ बदलना है।
गांधीजी ने इन विचारधाराओं को विभिन्न प्रेरणादायक स्रोतों जैसे- भगवद्गीता, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, बाइबिल, गोपाल कृष्ण गोखले, टॉलस्टॉय, जॉन रस्किन आदि से विकसित किया।
टॉलस्टॉय की पुस्तक 'द किंगडम ऑफ गॉड इज विदिन यू' का महात्मा गांधी पर गहरा प्रभाव था।
गांधीजी ने रस्किन की पुस्तक 'अंटू दिस लास्ट' से 'सर्वोदय' के सिद्धांत को ग्रहण किया और उसे जीवन में उतारा।
इन विचारों को बाद में "गांधीवादियों" द्वारा विकसित किया गया है, विशेष रूप से, भारत में विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण तथा भारत के बाहर मार्टिन लूथर किंग जूनियर और अन्य लोगों द्वारा।
प्रमुख गांधीवादी विचारधारा
सत्य और अहिंसा: गांधीवादी विचारधारा के ये 2 आधारभूत सिद्धांत हैं।
गांधी जी का मानना था कि जहाँ सत्य है, वहाँ ईश्वर है तथा नैतिकता - (नैतिक कानून और कोड) इसका आधार है।
अहिंसा का अर्थ होता है प्रेम और उदारता की पराकाष्ठा। गांधी जी के अनुसार अहिंसक व्यक्ति किसी दूसरे को कभी भी मानसिक व शारीरिक पीड़ा नहीं पहुँचाता है।
सत्याग्रह: इसका अर्थ है सभी प्रकार के अन्याय, उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ शुद्धतम आत्मबल का प्रयोग करना।
यह व्यक्तिगत पीड़ा सहन कर अधिकारों को सुरक्षित करने और दूसरों को चोट न पहुँचाने की एक विधि है।
सत्याग्रह की उत्पत्ति उपनिषद, बुद्ध-महावीर की शिक्षा, टॉलस्टॉय और रस्किन सहित कई अन्य महान दर्शनों में मिल सकती है।
सर्वोदय- सर्वोदय शब्द का अर्थ है 'यूनिवर्सल उत्थान' या 'सभी की प्रगति'। यह शब्द पहली बार गांधी जी ने राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर जॉन रस्किन की पुस्तक "अंटू दिस लास्ट" पर पढ़ा था।
स्वराज- हालाँकि स्वराज शब्द का अर्थ स्व-शासन है, लेकिन गांधी जी ने इसे एक ऐसी अभिन्न क्रांति की संज्ञा दी जो कि जीवन के सभी क्षेत्रों को समाहित करती है।
गांधी जी के लिये स्वराज का मतलब व्यक्तियों के स्वराज (स्व-शासन) से था और इसलिये उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिये स्वराज का मतलब अपने देशवासियों हेतु स्वतंत्रता है और अपने संपूर्ण अर्थों में स्वराज स्वतंत्रता से कहीं अधिक है, यह स्व-शासन है, आत्म-संयम है और इसे मोक्ष के बराबर माना जा सकता है।
ट्रस्टीशिप- ट्रस्टीशिप एक सामाजिक-आर्थिक दर्शन है जिसे गांधी जी द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
यह अमीर लोगों को एक ऐसा माध्यम प्रदान करता है जिसके द्वारा वे गरीब और असहाय लोगों की मदद कर सकें।
यह सिद्धांत गांधी जी के आध्यात्मिक विकास को दर्शाता है, जो कि थियोसोफिकल लिटरेचर और भगवद्गीता के अध्ययन से उनमें विकसित हुआ था।
स्वदेशी: स्वदेशी शब्द संस्कृत से लिया गया है और यह संस्कृत के 2 शब्दों का एक संयोजन है। 'स्व' का अर्थ है स्वयं और 'देश' का अर्थ है देश। इसलिये स्वदेश का अर्थ है अपना देश। स्वदेशी का अर्थ अपने देश से है, लेकिन ज्यादातर संदर्भों में इसका अर्थ आत्मनिर्भरता के रूप में लिया जा सकता है।
स्वदेशी राजनीतिक और आर्थिक दोनों तरह से अपने समुदाय के भीतर ध्यान केंद्रित करता है।
यह समुदाय और आत्मनिर्भरता की अन्योन्याश्रितता है।
गांधी जी का मानना था कि इससे स्वतंत्रता (स्वराज) को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि भारत का ब्रिटिश नियंत्रण उनके स्वदेशी उद्योगों के नियंत्रण में निहित था। स्वदेशी भारत की स्वतंत्रता की कुंजी थी और महात्मा गांधी के रचनात्मक कार्यक्रमों में चरखे द्वारा इसका प्रतिनिधित्व किया गया था।
आज के संदर्भ में गांधीवादी विचारधारा की प्रासंगिकता
सत्य और अहिंसा के आदर्श गांधी के संपूर्ण दर्शन को रेखांकित करते हैं तथा यह आज भी मानव जाति के लिये अत्यंत प्रासंगिक है।
महात्मा गांधी की शिक्षाएं आज और अधिक प्रासंगिक हो गई हैं जब कि लोग अत्याधिक लालच, व्यापक स्तर पर हिंसा और भागदौड़ भरी जीवन शैली का समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग, दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला और म्याँमार में आंग सान सू की जैसे लोगों के नेतृत्व में कई उत्पीड़ित समाज के लोगों को न्याय दिलाने हेतु गांधीवादी विचारधारा को सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जो इसकी प्रासंगिकता का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
दलाई लामा ने कहा, "आज विश्व शांति और विश्वयुद्ध, अध्यात्म और भौतिकवाद, लोकतंत्र व अधिनायकवाद के बीच एक बड़ा युद्ध चल रहा है।" इन बड़े युद्धों से लड़ने के लिये ये ठीक होगा कि समकालीन समय में गांधीवादी दर्शन को अपनाया जाए।
निष्कर्ष
गांधीवादी विचारधारा ने ऐसे संस्थानों और कार्यप्रणालियों के निर्माण को आकार दिया जहाँ सभी की आवाज और परिप्रेक्ष्य को स्पष्ट किया जा सकता है।
उनके अनुसार, लोकतंत्र ने कमजोरों को उतना ही मौका दिया, जितना ताकतवरों को।
उनके स्वैच्छिक सहयोग, सम्मानजनक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के आधार पर कार्य करने के सुझाव को कई अन्य आधुनिक लोकतंत्रों में अपनाया गया। साथ ही, राजनीतिक सहिष्णुता और धार्मिक विविधता पर उनका ज़ोर समकालीन भारतीय राजनीति में अपनी प्रासंगिकता को बनाए रखता है।
सत्य, अहिंसा, सर्वोदय और सत्याग्रह तथा उनके महत्त्व से गांधीवादी दर्शन बनता है और ये गांधीवादी विचारधरा के चार आधार है ।
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फिक्र रहिए गांधी मरा नहीं करते, क्योंकि वो व्यक्ति नहीं विचार हैं।
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